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हाचिजो-जिमा के स्टैग बीटल की कहानी सुलझाते हुए

जबड़ों के अंतर से द्वीपों और समुद्र के इतिहास तक

जापान के मुख्य द्वीपों और हाचिजो-जिमा, दोनों जगह आरी जैसे किनारों वाले बड़े जबड़ों के स्टैग बीटल रहते हैं। कल्पना कीजिए कि दोनों जगहों के लगभग बराबर आकार के एक-एक नर को साथ रखा गया है। हाचिजो-जिमा वाले नर के जबड़े छोटे हैं। क्या केवल इतना देखकर कहा जा सकता है कि वे अलग-अलग प्रजातियाँ हैं?

जबड़ों का अंतर प्रजातियों को अलग पहचानने का एक सुराग ज़रूर है। कई कीटों की तुलना करने पर शोधकर्ताओं को दिखा कि हाचिजो-जिमा के नरों के जबड़े, शरीर के अनुपात में, मुख्य द्वीपों के नरों से छोटे होने की प्रवृत्ति रखते हैं।

हाचिजो-जिमा पर यह अंतर क्यों पैदा हुआ? यह द्वीप उन ज्वालामुखियों से बना जो समुद्र तल से उठकर पानी की सतह के ऊपर आए। माना जाता है कि यहाँ ज़मीन बनने के बाद ही इन कीटों के पूर्वज समुद्र पार करके पहुँचे होंगे।

हाचिजो-जिमा पर बसने के बाद भी क्या मुख्य द्वीपों और दूसरे द्वीपों से नए कीट आते रहे? कोदाई किशिनो और उनके साथियों ने इन्हीं आवाजाहियों पर ध्यान दिया। बाहर की आबादियों से संपर्क में अंतर, छोटे जबड़ों के विकास से जुड़ा हो सकता है। इस लेख में हम इसी रहस्य के पीछे चलेंगे।

जबड़ों की तुलना के लिए छाती की चौड़ाई मापना

शरीर की लंबाई बताती है कि कोई जानवर कितना लंबा है। स्टैग बीटल की कुछ पहचान-पुस्तकें इसे जबड़ों की नोक से शरीर के पिछले सिरे तक मापती हैं। इस तरह मापने पर, बाकी शरीर बराबर होने के बावजूद लंबे जबड़ों वाला कीट लंबा निकलेगा। इसलिए जबड़ों की लंबाई को शरीर के आकार से तुलना करने के लिए टीम ने दूसरा पैमाना चुना: सिर के ठीक पीछे वाले वक्ष, यानी छाती वाले हिस्से की चौड़ाई।

शोधकर्ताओं ने मुख्य द्वीपों के नासु कोगेन और ओशिमा, नीजिमा, कोजुशिमा तथा हाचिजो-जिमा के कीटों की ठीक ऊपर से तस्वीरें लीं। तस्वीरों में उन्होंने वक्ष की चौड़ाई और जबड़ों की लंबाई मापी। वक्ष की चौड़ाई के अनुपात में नर के जबड़े इस क्रम में छोटे होने की प्रवृत्ति दिखाते थे: मुख्य द्वीप, ओशिमा, नीजिमा और कोजुशिमा। जाँचे गए कीटों में हाचिजो-जिमा के जबड़े अनुपात में सबसे छोटे थे।

शुरुआत में हाचिजो-जिमा के कीटों को मुख्य द्वीपों के आरी जैसे जबड़ों वाले स्टैग बीटल की ही प्रजाति का, स्थानीय विशेषताओं वाला समूह माना गया था। 1985 में रूप-रंग के अंतर के आधार पर उन्हें अलग प्रजाति माना जाने लगा। उनके जापानी नाम का अर्थ है हाचिजो का आरी जैसे जबड़ों वाला स्टैग बीटल। किशिनो की टीम ने इस बार यह जाँचा कि इन कीटों का दूसरे द्वीपों और मुख्य द्वीपों के कीटों से अतीत में कैसा संबंध रहा है।

हाचिजो-जिमा मुख्य द्वीपों से कब अलग हुआ?

अगर दोनों जगहों के कीटों के पूर्वज एक थे, तो क्या ये ज़मीनें कभी जुड़ी हुई थीं? हाचिजो-जिमा, इज़ु प्रायद्वीप से समुद्र की ओर फैले इज़ु द्वीपसमूह के दक्षिण में स्थित एक ज्वालामुखीय द्वीप है। भूवैज्ञानिक शोध में इसके मुख्य द्वीपों से टूटकर बनने का प्रमाण नहीं मिला है। इसकी नींव बने ज्वालामुखी समुद्र तल पर बने और बाद में पानी के ऊपर उभरे।

यह कब हुआ, इसका एक सुराग क्यूशू से उड़कर आई ज्वालामुखीय राख देती है। हाचिजो-जिमा की ज़मीन पर बनी परतों के बीच लगभग 240,000 वर्ष पुरानी राख मिली है। इससे लगता है कि राख गिरते समय यहाँ पहले से समुद्र के ऊपर ज़मीन थी।

इस इतिहास को देखते हुए यही उचित लगता है कि कीटों के पूर्वज ज़मीन बनने के बाद समुद्र पार करके आए। पानी में बहती लकड़ी पर सवार होकर आना एक संभव तरीका है। क्या वे सीधे मुख्य द्वीपों से आए या पास के द्वीपों से होकर? वे किस पर आए और कब पहुँचे? चट्टानों की परतें बस इतना बताती हैं कि उस समय तक ज़मीन मौजूद थी।

बसने के बाद की आवाजाही के निशान DNA में खोजना

मान लीजिए कि कीटों के पूर्वज समुद्र पार करके द्वीप पर बस गए। क्या उसके बाद भी मुख्य द्वीपों या दूसरे द्वीपों से कीट आते रहे? हम उस पुराने आवागमन को सीधे नहीं देख सकते। लेकिन अगर आने वाले कीटों ने द्वीप पर संतान पैदा की, तो उनका DNA आज के वंशजों तक पहुँचा हो सकता है। टीम ने आज जीवित कीटों के DNA में इन्हीं निशानों को खोजा।

DNA एक पदार्थ है जिसमें शरीर की बनावट और कामकाज से जुड़ी जानकारी होती है। इसकी संरचना में बेस कहलाने वाले चार प्रकार के रासायनिक घटक होते हैं। उनका क्रम जानकारी संजोता है। यह क्रम माता-पिता से संतान तक जाता है, लेकिन कभी-कभी इसका कोई छोटा हिस्सा बदल जाता है। अलग आबादियों में कौन-से बदलाव बचे हैं, इसकी तुलना से उनके आपसी संबंध जाँचे जा सकते हैं।

टीम ने सबसे पहले माइटोकॉन्ड्रिया के DNA की तुलना की। माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओं के अंदर होते हैं। वे भोजन से मिले पोषक तत्वों का इस्तेमाल करके ऊर्जा को ऐसे रूप में तैयार करते हैं जिसे कोशिका उपयोग कर सके। कई जानवरों में उनका DNA मुख्य रूप से माँ से संतान को मिलता है। इसलिए इसके क्रम की तुलना करके माँ की ओर के रिश्ते खोजे जा सकते हैं, जैसे वंशवृक्ष में माँ से उनकी माँ की ओर बढ़ना।

शोधकर्ताओं ने माइटोकॉन्ड्रिया के DNA का एक हिस्सा पढ़ा। इसमें ऊर्जा बनाने के काम में ज़रूरी एक घटक को तैयार करने की जानकारी होती है।

उन्होंने कीटों के DNA क्रम में समान और अलग हिस्सों की तुलना की। इन नतीजों से उन्होंने अनुमान लगाया कि समान पूर्वजों से अलग-अलग वंश किस क्रम में अलग हुए। इन रिश्तों को पेड़ की शाखाओं जैसे रूप में दिखाने को विकासवादी वंशवृक्ष कहा जाता है।

इज़ु के आठ द्वीपों, मुख्य द्वीपों और कुछ अन्य जगहों के कीटों से ऐसा वंशवृक्ष बनाया गया। हाचिजो-जिमा और मियाके-जिमा सहित दक्षिण के द्वीप एक ही शाखा पर आए, जो मुख्य द्वीपों वाली शाखा से अलग थी। इसका मतलब है कि इस शाखा के कीटों का आपस में साझा पूर्वज, मुख्य द्वीपों के कीटों के साथ साझा पूर्वज की तुलना में, अधिक हाल का होने का अनुमान था। ओशिमा और नीजिमा मुख्य द्वीपों वाली शाखा में आए। माइटोकॉन्ड्रिया के DNA के और हिस्से जोड़कर तुलना करने पर भी यह शाखा-विन्यास नहीं बदला।

इसके बाद टीम ने केंद्रक के DNA की तुलना की, जो पिता और माँ दोनों से मिलता है। केंद्रक कोशिका का वह हिस्सा है जिसमें उसका अधिकांश DNA रहता है। शोधकर्ताओं ने केंद्रक के DNA में मौजूद 1,317 जीनों की तुलना की। जीन DNA का एक खंड है जिसमें शरीर की बनावट या कामकाज से जुड़ी जानकारी होती है।

केंद्रक के DNA से बने वंशवृक्ष में ओशिमा, नीजिमा, मियाके-जिमा और हाचिजो-जिमा के चार द्वीप मुख्य द्वीपों से अलग एक शाखा पर आए। फिर यह शाखा हाचिजो-जिमा और बाकी तीन द्वीपों में बँटी। मियाके-जिमा, जो माइटोकॉन्ड्रिया के DNA में हाचिजो-जिमा के साथ था, केंद्रक के DNA में ओशिमा और नीजिमा के साथ एक शाखा पर था।

क्या इस अंतर का संबंध बसने के बाद की आवाजाही से हो सकता है? अगर बाद में आए कीटों ने द्वीप पर संतान पैदा की, तो उनका DNA भी स्थानीय वंशजों में जुड़ गया होगा। टीम ने इस संभावना की गहराई से जाँच की।

मुख्य द्वीपों जैसे DNA बदलाव किस तरफ ज़्यादा हैं?

शोधकर्ताओं ने ओशिमा, नीजिमा और मियाके-जिमा को एक समूह मानकर हाचिजो-जिमा की आबादी से तुलना की। उन्होंने देखा कि किस समूह में DNA के ऐसे स्थान ज़्यादा हैं जिन पर मुख्य द्वीपों वाले कीटों जैसे बदलाव हैं।

अगर दोनों समूह अलग होने के बाद मुख्य द्वीपों के कीटों के साथ संतान नहीं पैदा कर रहे थे, तो इन साझा बदलावों की संख्या किसी एक तरफ बहुत अधिक झुकी होने की उम्मीद नहीं होती। लेकिन तीन द्वीपों के समूह में ऐसे स्थान हाचिजो-जिमा से ज़्यादा मिले।

अगर मुख्य द्वीपों से आए कीटों और तीन द्वीपों के कीटों की संतान हुई हो, तो उसे मुख्य द्वीप वाले माता-पिता का DNA मिला होगा। इससे इस असंतुलन को समझाया जा सकता है। अन्य विश्लेषणों को भी मिलाकर टीम इस निष्कर्ष पर पहुँची कि मुख्य द्वीपों से आए कीटों ने इन तीन द्वीपों पर वंशज छोड़े थे। हाचिजो-जिमा की आबादी में ऐसे ही जुड़ाव का प्रमाण नहीं मिला।

क्या कुरोशियो धारा ने हाचिजो-जिमा का रास्ता रोका?

ओशिमा, नीजिमा और मियाके-जिमा में मुख्य द्वीपों से संबंध के निशान दिखे, लेकिन हाचिजो-जिमा में वही निशान नहीं मिले। सभी द्वीप समुद्र से अलग हैं। फिर यह फर्क क्यों?

इसे समझने के लिए टीम ने DNA से यह भी अनुमान लगाया कि मुख्य द्वीपों और हाचिजो-जिमा की आबादियाँ कब अलग हुईं। अनुमान लगभग 150,000 वर्ष पहले का था। शोधपत्र में दी गई अनुमान की सीमा लगभग 120,000 से 190,000 वर्ष पहले तक है। गणना में माना गया कि अलग होने के बाद दोनों आबादियों ने आपस में संतान पैदा नहीं की। इसलिए यह पहले कीटों के द्वीप पर पहुँचने की तारीख नहीं बताती।

भूवैज्ञानिक परतें बताती हैं कि लगभग 240,000 वर्ष पहले हाचिजो-जिमा पर ज़मीन थी। उसके बाद कीटों के संबंधों को समझने के लिए किशिनो की टीम ने कुरोशियो पर ध्यान दिया। यह तेज़ समुद्री धारा कभी-कभी मिकुरा-जिमा और हाचिजो-जिमा के बीच बहती है। शोधकर्ताओं ने सोचा कि इसने द्वीप तक पहुँचने में बाधा डाली हो सकती है।

समुद्र तल की जमा मिट्टी से पुराने समुद्रों का अध्ययन करने वाले शोध बताते हैं कि एक ठंडे दौर में कुरोशियो आज से अधिक दक्षिण में बहती थी। किशिनो और उनके साथियों ने प्रस्ताव रखा कि उस दौर में कीटों के पूर्वज हाचिजो-जिमा पहुँच पाए होंगे। बाद में धारा उत्तर की ओर खिसककर द्वीपों के बीच से बहने लगी होगी। तब वह बहती लकड़ी को दूसरी दिशा में ले जाकर हाचिजो-जिमा पहुँचना कठिन बना सकती थी। यह एक परिकल्पना है। आबादियों के अलग होने का अनुमान एक बड़े समय-अंतराल में आता है, इसलिए यह साफ़ नहीं है कि वह धारा का रास्ता बदलने के समय से ठीक मेल खाता है या नहीं।

जब भी मुख्य द्वीपों के कीट किसी द्वीप पर वंशज छोड़ते हैं, स्थानीय आबादी में उनका DNA जुड़ता है। टीम का विचार है कि हाचिजो-जिमा पर ऐसा कम हुआ होगा। इससे द्वीप के जीवन के अनुकूल बदलाव ज़्यादा आसानी से बने रहे होंगे और छोटे जबड़ों के विकास को भी बढ़ावा मिला होगा।

लार्वा के बढ़ते समय क्या बदला गया?

अगर जबड़ों के बढ़ने का तरीका बदला है, तो वृद्धि से जुड़े DNA में भी कोई सुराग मिल सकता है। लार्वा की कोशिकाओं में एक ऐसा घटक होता है जो शरीर के पोषण के अनुसार आने वाले वृद्धि-संकेत ग्रहण करता है। हाचिजो-जिमा के कीटों में इस घटक को बनाने की जानकारी वाले DNA में ऐसे अंतर मिले जो दूसरी आबादियों में नहीं दिखे।

टीम ने मुख्य द्वीपों के लार्वा दो समूहों में बाँटे और एक समूह में इस घटक का बनना कम कर दिया। वयस्क नरों को मापने पर, कम उत्पादन वाले समूह में जबड़े शरीर के अनुपात में दूसरे समूह से छोटे थे। इस प्रयोग ने पुष्टि की कि यह घटक जबड़ों के विकास में भूमिका निभाता है।

क्या पता चला और क्या जाँचना बाकी है?

इस अध्ययन ने पुष्टि की कि शरीर के आकार का ध्यान रखने पर भी हाचिजो-जिमा के नरों के जबड़े छोटे हैं। DNA की तुलना में ओशिमा, नीजिमा और मियाके-जिमा पर मुख्य द्वीपों से आए कीटों के वंशज होने के निशान मिले। हाचिजो-जिमा में वही निशान नहीं मिले। यानी मुख्य द्वीपों से संबंध हर द्वीप पर एक जैसे नहीं थे।

टीम का विचार है कि हाचिजो-जिमा में मुख्य द्वीपों का DNA कम जुड़ने से द्वीप के जीवन के अनुकूल बदलाव ज़्यादा आसानी से बचे और छोटे जबड़ों का विकास आगे बढ़ा होगा। छोटे जबड़ों में द्वीप का पर्यावरण और बाहर से कम नए कीट आने का इतिहास, दोनों भूमिका निभा सकते हैं।

इस व्याख्या को जाँचने के लिए अभी काम बाकी है। प्रयोग ने दिखाया कि मुख्य द्वीपों के लार्वा में वृद्धि से जुड़े एक घटक का उत्पादन घटाने पर जबड़े छोटे होते हैं। लेकिन हाचिजो-जिमा में मिले DNA अंतर स्वयं उस घटक का काम बदलते हैं या नहीं, यह नहीं जाँचा गया है। छोटे जबड़े द्वीप पर कब उपयोगी हैं, यह जानने के लिए नर कहाँ मिलते हैं और किस चीज़ के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, इसका भी अध्ययन करना होगा।

कुरोशियो ने हाचिजो-जिमा तक आवाजाही में बाधा डाली, यह व्याख्या भी अभी परिकल्पना है। पहले कीट कब और किस रास्ते से पहुँचे, और बाद के आवागमन कैसे बदले, इसके लिए और प्रमाण चाहिए। उदाहरण के लिए, मिकुरा-जिमा और हाचिजो-जिमा दोनों पर पाए जाने वाले अन्य कीटों की तुलना करके देखा जा सकता है कि क्या उनके DNA में भी इन दोनों द्वीपों के बीच अधिक अंतर मिलता है। इससे समुद्री धारा के प्रभाव का सुराग मिल सकता है।

जबड़ों के अंतर की तह में जाते-जाते हम द्वीप की उत्पत्ति और समुद्र के बहाव तक पहुँच गए। क्या मुख्य द्वीपों से कम संपर्क ने हाचिजो-जिमा के कीटों को अपने ढंग से विकसित होने में मदद की? इन नतीजों से आगे बढ़कर DNA के काम और द्वीप पर कीटों के जीवन को जोड़कर जाँचना अगली चुनौती है।

संदर्भ